SEBI ने LIC को क्यों NSE में हिस्सेदारी घटाने को कहा | ट्रेड निवेश

ट्रेड निवेश | भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (SEBI) ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में अपनी हिस्सेदारी घटाने को कहा है. बाजार नियामक सेबी ने LIC को NSE में अपनी हिस्सेदारी 5 फीसदी घटाने के लिए कहा है.





देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशक एलआईसी ने कुछ समय पहले IDBI बैंक का अधिग्रहण किया था. तब आईडीबीआई सरकारी बैंक था. इस अधिग्रहण से एनएसई के सदस्यों (एनएसई में हिस्सेदारी रखने वाले) के लिए किसी कंपनी में हिस्सेदारी की तय सीमा का उल्लंघन हुआ है. इसी वजह से सेबी ने एलआईसी को यह निर्देश दिया है.

LIC और IDBI बैंक, दोनों ही के पास NSE की हिस्सेदारी है. मगर LIC की हिस्सेदारी इस नियम के दायरे से बाहर है, क्योंकि इस बीमा दिग्गज को सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निवेशक का दर्जा हासिल है.

कितनी है हिस्सेदारी?

इस बीमा दिग्गज द्वारा IDBI बैंक के अधिग्रहण के बाद समीकरण बदल गए हैं. मामले से जुड़े दो सूत्रों के मुताबिक, IDBI बैंक के पास NSE की 1 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है और यह एक ट्रेंडिंग सदस्य भी है. अब आईडीबीआई की हिस्सेदारी को मिलाकर LIC पूरी हिस्सेदारी बतौर सदस्य देखी जा रही है.

ऐसे में NSE में LIC की पूरी हिस्सेदारी 4.9 फीसदी की सीमा के पार हो जाती है. इसलिए बाजार नियामक ने एलआईसी को निर्देश दिया है. सूत्रों के अनुसार, सेबी ने एलआईसी के पांच फीसदी मताधिकार को भी फ्रीज कर दिया है. अभी तक दोनों ही पक्षों ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है.

उपर्युक्त में से एक सूत्र ने कहा, "सेबी के नियमानुसार, LIC और IDBI बैंक की हिस्सेदारी को मिलाकर पेश किया जाएगा, क्योंकि बीमा कंपनी इस सरकारी बैंक की प्रमोटर है. यदि IDBI बैंक ने विलय से पहले अपनी 1 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी होती, तो LIC पर हिस्सेदारी को लेकर कोई तलवार नहीं लटकती."

बताया जा रहा है कि इस 5 फीसदी हिस्सेदारी की कीमत 2,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है. साल 2018 में हुए एक सौदे के मुताबिक, IFCI ने स्टॉक एक्सचेंज परिचालक की 0.22 फीसदी हिस्सेदार 93 करोड़ रुपये में बेची थी. इस हिसाब से इसकी वैल्यूएशन 42,000 करोड़ बैठती है.

जून के आंकड़ों के मुताबिक, LIC के पास अपनी निजी पोर्टफोलियो में NSE की 12.5 फीसदी की हिस्सेदारी थी, जबकि IDBI बैंक के पास 1 फीसदी से अधिक शेयर हैं. IDBI बैंक के अधिग्रहण के बाद LIC को हिस्सेदारी कम करने का आदेश मिला है, क्योंकि यह अधिकतम हिस्सेदारी के नियम का उल्लंघन है.

IDBI बैंक NSE के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं. जून के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक और SBI कैप्स के पास भी एक्सचेंज की 8 फीसदी हिस्सेदारी है. स्टॉक होल्डिंक कॉर्प के पास 4.4 फीसदी की हिस्सेदारी है. विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास 31.6 फीसदी की हिस्सेदारी है.

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